रामचरितमानस, पंचतंत्र, और सहृदयालोक-लोकन को यूनेस्को की विश्व एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर की स्मृति में शामिल किया गया

यूनेस्को मान्यता: भारत की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत की पुष्टि करते हुए, रामचरितमानस, पंचतंत्र, और सहृदयालोक-लोकन को यूनेस्को की विश्व एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर की स्मृति में शामिल किया गया है।

महत्व: यूनेस्को द्वारा यह मान्यता भारत के लिए गर्व का स्रोत है और विश्व स्तर पर विविध कथाओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने के महत्व पर जोर देती है।

साहित्यिक प्रभाव: क्रमशः गोस्वामी तुलसीदास, पंडित विष्णु शर्मा और आचार्य आनंदवर्धन द्वारा लिखित इन रचनाओं ने भारतीय साहित्य और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है, नैतिक मूल्यों और कलात्मक अभिव्यक्तियों को आकार दिया है।

कालातीतता: इन साहित्यिक उत्कृष्ट कृतियों की कालातीत प्रकृति भौगोलिक और लौकिक सीमाओं को पार करती है, जो दुनिया भर के पाठकों और कलाकारों पर स्थायी प्रभाव छोड़ती है।

आईजीएनसीए की भूमिका: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने उलानबटार में एशिया और प्रशांत के लिए मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमेटी की 10वीं बैठक के दौरान इस मान्यता को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न: किस संगठन ने विश्व एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर की स्मृति में रामचरितमानस, पंचतंत्र और सहृदयालोक-लोकन को शामिल किया?

ए) यूनिसेफ
बी) यूनेस्को
ग) कौन
घ) विश्व बैंक

उत्तर: बी) यूनेस्को

प्रश्न: रामचरितमानस की रचना किसने की?

a) आचार्य आनंदवर्धन
b) गोस्वामी तुलसीदास
c) पंडित विष्णु शर्मा
d) रमेश चंद्र गौड़

उत्तर: बी) गोस्वामी तुलसीदास

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